१. जम्बूद्वीप और सुमेरु पर्वत
जैन भूगोल के अनुसार, मध्यलोक के बीचोंबीच जम्बूद्वीप स्थित है।
सुमेरु पर्वत: जम्बूद्वीप के बिल्कुल मध्य भाग में १ लाख योजन ऊँचा सुमेरु पर्वत है।
महत्व: यह पर्वत अत्यंत वंदनीय है क्योंकि यहाँ तीर्थंकरों का जन्माभिषेक (जन्म कल्याणक के बाद का अभिषेक) संपन्न होता है।
२. भरतक्षेत्र और विजयार्ध पर्वत की स्थिति
जम्बूद्वीप के दक्षिण में भरतक्षेत्र स्थित है, जिसका विस्तार (व्यास) ५२६ योजन और ६ कला है।
विजयार्ध पर्वत: भरतक्षेत्र के ठीक मध्य में शुक्लध्यान के पुंज के समान उज्ज्वल और विशाल 'विजयार्ध पर्वत' शोभायमान है।
माप (Dimensions): यह पर्वत २५ योजन ऊँचा, ५० योजन चौड़ा और भूमि के भीतर सवा छः (६.२५) योजन गहरा है।
३. विजयार्ध पर्वत की रचना और नगर
विजयार्ध पर्वत विद्याधरों का निवास स्थान है। इसकी संरचना अद्भुत है:
श्रेणियाँ और नगर: पर्वत पर दो प्रमुख श्रेणियां हैं— दक्षिण श्रेणी और उत्तर श्रेणी।
दक्षिण श्रेणी में: ५० नगर।
उत्तर श्रेणी में: ६० नगर।
कुल नगर: ११० नगर हैं, और प्रत्येक नगर के अधीन १-१ करोड़ ग्राम हैं।
धर्म और संस्कृति: यहाँ जैन धर्म सदा विद्यमान रहता है। यहाँ अकृत्रिम (शाश्वत), रत्नजटित और स्वर्णमयी चैत्यालय (मंदिर) हैं, जहाँ देवगण और विद्याधर-विद्याधरियाँ नित्य पूजन-अभिषेक करते हैं।
वर्ण व्यवस्था: यहाँ क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र—ये तीन वर्ण पाए जाते हैं।
४. रथनूपुर नगरी और राजा ज्वलनजटी
विजयार्ध पर्वत की दक्षिण श्रेणी में 'रथनूपुर चक्रवाल' नाम की एक अत्यंत प्रसिद्ध नगरी है।
राजा ज्वलनजटी: इस नगरी के स्वामी राजा ज्वलनजटी थे, जो एक शक्तिशाली विद्याधर और गुणों के भंडार थे।
महारानी वायुवेगा: उनकी महारानी का नाम वायुवेगा था। वायुवेगा दिव्यतिलक नगर के राजा चन्द्राभ और रानी सुभद्रा की पुत्री थीं।
Key Points in English
Here are the essential highlights regarding Jain Geography and Vijayardh Mountain:
Sumeru Parvat: Located in the center of Jambudvipa, it is 100,000 Yojans high. It is the site for Tirthankara's birth consecrations.
Vijayardh Mountain: Located in the middle of Bharat Kshetra. Dimensions: 25 Yojans high, 50 Yojans wide.
Cities of Vidyadhars: Vijayardh hosts 110 cities (50 in South range, 60 in North range) inhabited by Vidyadhars.
Eternal Temples: There are natural, eternal (Akrtrim) Jain temples made of gold and gems.
King Jwalanjati: Ruler of the Rathnupur Chakrawal city on Vijayardh (South range). His queen was Vayuvega.