प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ

The Origin of Alms-giving and Supreme Omniscience

अक्षय तृतीया: प्रथम आहार (The First Alms)

भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) को दीक्षा के पश्चात प्रथम आहार प्राप्त करने में 1 वर्ष और 39 दिन का समय लगा। यह ऐतिहासिक घटना हस्तिनापुर नगर में वैशाख शुक्ला तृतीया को संपन्न हुई।

दाता: राजा श्रेयांस एवं सोमप्रभ
वस्तु: इक्षु रस (गन्ने का रस)

इसे "आखा तीज" क्यों कहते हैं?
क्योंकि इस दिन दिया गया आहार 'अक्षय' (कभी न मिटने वाला फल देने वाला) हो गया था।

नवधा भक्ति (The Ninefold Devotion)

चूंकि आदिनाथ इस युग के पहले मुनि थे, लोग आहार देने की विधि नहीं जानते थे। राजा श्रेयांस को अपने पूर्व जन्म (राजा वज्रजंघ) का स्मरण हुआ, जिससे उन्हें आहार दान की नवधा भक्ति का ज्ञान हुआ:

  1. पड़गाहन (Welcoming)
  2. उच्च आसन देना (Offering High Seat)
  3. पाद प्रक्षालन (Washing Feet)
  4. पूजन (Worship)
  5. नमस्कार (Obeisance)
  6. मन शुद्धि (Purity of Mind)
  7. वचन शुद्धि (Purity of Speech)
  8. काय शुद्धि (Purity of Body)
  9. आहार की प्रार्थना (Requesting to Accept Food)

केवलज्ञान (Divine Enlightenment)

भगवान आदिनाथ को ज्ञान की पराकाष्ठा पुरिमतालपुर नगर में प्राप्त हुई।

  • 🌳 वन (Garden): शकटास्य उद्यान (Shaktasya Garden)
  • 🌳 वृक्ष (Tree): वट वृक्ष / न्यग्रोध (Banyan Tree)
  • 👑 नगर राजा: वृषभसेन (भगवान के पुत्र)

याद रखने योग्य बिंदु:

• आहार हस्तिनापुर में हुआ | • 404 दिनों के उपवास के बाद आहार मिला | • गन्ने के रस का आहार लिया गया | • केवलज्ञान वट वृक्ष के नीचे हुआ।