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Lord Rishabhdev: The History of Akshaya Tritiya and Kevalgyan
Jan 20, 2026
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Quick Wisdom
Lord Rishabhdev, the 1st Tirthankara, received his first alms (Ikshu Ras) after 1 year and 39 days in Hastinapur. This day is celebrated as Akshaya Tritiya. King Shreyans recalled the method of "Navdha Bhakti" through past-life recollection (Jati-Smaran). Later, Lord Adinath attained Kevalgyan under a Banyan (Vat) tree in Purimtalpur.
अक्षय तृतीया: प्रथम आहार (The First Alms)
भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) को दीक्षा के पश्चात प्रथम आहार प्राप्त करने में 1 वर्ष और 39 दिन का समय लगा। यह ऐतिहासिक घटना हस्तिनापुर नगर में वैशाख शुक्ला तृतीया को संपन्न हुई।
दाता: राजा श्रेयांस एवं सोमप्रभ
वस्तु: इक्षु रस (गन्ने का रस)
इसे "आखा तीज" क्यों कहते हैं?
क्योंकि इस दिन दिया गया आहार 'अक्षय' (कभी न मिटने वाला फल देने वाला) हो गया था।
नवधा भक्ति (The Ninefold Devotion)
चूंकि आदिनाथ इस युग के पहले मुनि थे, लोग आहार देने की विधि नहीं जानते थे। राजा श्रेयांस को अपने पूर्व जन्म (राजा वज्रजंघ) का स्मरण हुआ, जिससे उन्हें आहार दान की नवधा भक्ति का ज्ञान हुआ:
- पड़गाहन (Welcoming)
- उच्च आसन देना (Offering High Seat)
- पाद प्रक्षालन (Washing Feet)
- पूजन (Worship)
- नमस्कार (Obeisance)
- मन शुद्धि (Purity of Mind)
- वचन शुद्धि (Purity of Speech)
- काय शुद्धि (Purity of Body)
- आहार की प्रार्थना (Requesting to Accept Food)
केवलज्ञान (Divine Enlightenment)
भगवान आदिनाथ को ज्ञान की पराकाष्ठा पुरिमतालपुर नगर में प्राप्त हुई।
- 🌳 वन (Garden): शकटास्य उद्यान (Shaktasya Garden)
- 🌳 वृक्ष (Tree): वट वृक्ष / न्यग्रोध (Banyan Tree)
- 👑 नगर राजा: वृषभसेन (भगवान के पुत्र)
Common Questions
भगवान आदिनाथ का प्रथम आहार कितने समय के अंतराल पर हुआ?
भगवान आदिनाथ का प्रथम आहार दीक्षा के 1 वर्ष और 39 दिन (कुल 404 दिन) के बाद हुआ था।
राजा श्रेयांस को आहार देने की विधि (नवधा भक्ति) का ज्ञान कैसे हुआ?
भगवान के रूप को देखकर राजा श्रेयांस को जातिस्मरण (पूर्व जन्म का ज्ञान) हो गया। उन्हें याद आया कि 8 भव पहले वे रानी श्रीमती थे और भगवान राजा वज्रजंघ थे, तब उन्होंने मुनियों को आहार दिया था।
अक्षय तृतीया का जैन धर्म में क्या महत्व है?
इस दिन दान की परंपरा का प्रारंभ हुआ था। चूंकि भगवान को दिया गया दान अक्षय फल देने वाला सिद्ध हुआ, इसलिए इसे अक्षय तृतीया या आखा तीज कहा जाता है।
भगवान को केवलज्ञान कहाँ और किस वृक्ष के नीचे हुआ?
उन्हें पुरिमतालपुर नगर के शकटास्य उद्यान में वट वृक्ष (बरगद) के नीचे केवलज्ञान प्राप्त हुआ।