श्री श्रेयांस नाथ भगवान
The Path of Renunciation and Supreme Knowledge
✨ मुख्य विशेषताएँ (Key Highlights)
- दीक्षा नगर: सिंहपुर (Singhpur)
- दीक्षा वृक्ष: तेंदू वृक्ष (Tendu Tree)
- प्रथम पारणा: राजा नंद द्वारा सिद्धार्थ नगर में (खीर का आहार)
- केवलज्ञान: मनोहर वन (Manohar Van)
दीक्षा कल्याणक (The Initiation)
भगवान श्रेयांसनाथ ने संसार की मोह-माया त्याग कर सिंहपुर नगर में दीक्षा ग्रहण की। वे 'विमल प्रभा' नामक पालकी में सवार होकर मनोहर वन पहुंचे। उन्होंने अकेले नहीं, बल्कि 1,000 राजाओं के साथ पूर्वान्ह काल में जैनेश्वरी दीक्षा धारण की। दीक्षा के समय प्रभु ने दो उपवास (बेला) का नियम लिया था।
तप और प्रथम आहार (Penance and First Meal)
प्रभु ने दो वर्ष तक कठिन मौन तपस्या की। दीक्षा के उपरांत उनका प्रथम आहार सिद्धार्थ नगर में हुआ, जहाँ राजा नंद ने उन्हें परम भक्ति के साथ खीर (Kheer) का आहार प्रदान किया।
केवलज्ञान (Omniscience)
कठिन तपस्या के पश्चात माघ कृष्णा अमावस्या के पावन दिन, श्रवण नक्षत्र में भगवान को केवलज्ञान प्राप्त हुआ। यह दिव्य ज्ञान उन्हें मनोहर वन में उसी तेंदू वृक्ष के नीचे प्राप्त हुआ जहाँ उन्होंने दीक्षा ली थी।
संक्षिप्त जीवन परिचय
| पुत्र का नाम | श्री श्रेयस्कर (Shreyaskar) |
| दीक्षा समय | पूर्वान्ह काल (Morning) |
| केवलज्ञान नक्षत्र | श्रवण नक्षत्र (Shravan Nakshatra) |