श्री वासुपूज्य भगवान (12वें तीर्थंकर)
The Divine Life of Lord Vasupujya
जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर, भगवान वासुपूज्य का जीवन त्याग और वैराग्य की एक अद्भुत गाथा है। चम्पापुर की पावन धरा पर जन्मे प्रभु वासुपूज्य ने अहिंसा और सत्य का मार्ग प्रशस्त किया।
Lord Vasupujya, the 12th Tirthankara of Jainism, represents purity and detachment. Born in the holy city of Champapur, his life serves as a spiritual beacon for millions.
At a Glance (मुख्य जानकारी)
| Parents (माता-पिता) | राजा वसुपूज्य एवं माता जयावती (विजया) |
| Birthplace (जन्म स्थान) | चम्पापुर नगर (Champapur) |
| Symbol (चिह्न) | भैंसा (Buffalo / Mahisha) |
| Color (वर्ण) | विद्रुम / केशर (Saffron/Coral Red) |
| Height (ऊंचाई) | 70 धनुष (70 Dhanush) |
Life Journey (जीवन गाथा)
1. पूर्व जन्म (Previous Incarnation)
भगवान वासुपूज्य अपने पूर्व जन्म में वत्सकावती देश (रत्नपुर नगर) के राजा पद्मोत्तर थे। उनके पुत्र का नाम श्री धनमित्र था।
2. गर्भ एवं जन्म (Conception & Birth)
वे महाशक्र स्वर्ग से अवतरित होकर माता जयावती के गर्भ में आषाढ़ कृष्ण षष्ठी को आए। उनका जन्म फाल्गुन कृष्णा चतुर्दशी को इक्ष्वाकु वंश में हुआ था।
3. आयु एवं काल (Lifespan)
उनकी कुल आयु 72 लाख वर्ष थी, जिसमें से 18 लाख वर्ष उन्होंने कुमार काल (Youth) के रूप में व्यतीत किए।